Monthly Archives: August 2010

दोहरा व्यक्तित्व


हम माल में जाते हैं तय करते हैं टैग से दाम और दाम से गुणवत्ता खरीदते हैं एक हवाई चप्पल और कुछ और जरूरी सामान बिना चूँ चपड़ किये नहीं करते मोल भाव की कोशिश भी बढ़ा हुवा सा लगता है हमें … Continue reading

Posted in Uncategorized | 1 Comment

ऐ खुदा


बीज जैसा, होती पैदावार वैसी, सत्य है खेत क्यों सुनते है ताने, ये बता मेरे खुदा तूने ही पैदा किया और तू ही पालन हार है बेल ने फिर पेड़ को ठूँठा किया क्यूँ, ऐ खुदा मैं गरीबी में अमीरों … Continue reading

Posted in Uncategorized | Leave a comment

श्रद्धांजलि


आज की सारी रचनाएँ अपने पूज्य पिताजी को समर्पित करता हूँ जिनकी आज पुण्यतिथि है. आप इन्हें पढ़ें और समझें पिता के खोने के दुःख को आज पुण्य तिथि है पिताजी की आज से उन्नीस साल पहले पूरी की थी जीवन यात्रा पर शायद  दूर … Continue reading

Posted in Uncategorized | Tagged , , | Leave a comment

अपने बच्चों के नाम


खिलो कमल सा तुम मैं कीचड़ पर पानी सा फैला हूँ शांत रहूँ तो साफ़ दीखता पर अन्दर से मैला हूँ दूँगा तुमको पोषण मैं चाहे जितना विस्तार करो पर पोषक कीचड़ और पानी से भी थोडा प्यार करो

Posted in Uncategorized | 1 Comment

सास बहू


मेरी जब शादी हुई मेरी माँ ने मेरी पत्नी से कहा आज ही निश्चित कर लो बिटिया इस घर में बहू बन के रहना है या बेटी बन के बहू बनोगी तो सास से सामना होगा बेटी बन के रहोगी … Continue reading

Posted in Uncategorized | Tagged , | 1 Comment

मेरी चादर


मेरी चादर    फट गयी आज फँस कर मेरे ही अंगूठे में देखा था कल, फटी थी थोड़ी सी सिल लेता तो बच जाती पर क्या करूँ,  सुई धागा भी नहीं था मेरे पास सच कहता हूँ फैलाये थे पैर मैंने  … Continue reading

Posted in Uncategorized | Tagged | 3 Comments

कविता की फैक्ट्री


सोचता हूँ खोलूँ एक  फैक्ट्री कविता बनाने की आवश्यक रा मैटेरिअल है उपलब्ध काफी मात्र में हमारे चारो ओर बिना नंबर प्लेट के और बिना हेलमेट के सड़क पे फर्राटा चलते रौबदार पुलिस वाले, चौराहे पे लगी मूर्ति पर हगते … Continue reading

Posted in Uncategorized | 1 Comment