दोहरा व्यक्तित्व


हम माल में जाते हैं

तय करते हैं

टैग से दाम और दाम से गुणवत्ता

खरीदते हैं एक हवाई चप्पल

और कुछ और जरूरी सामान

बिना चूँ चपड़ किये

नहीं करते

मोल भाव की कोशिश भी

बढ़ा हुवा सा लगता है

हमें भी अपना रुतबा

करते हैं भुगतान

रसीद को सँभालते हैं ऐसे

बेटे का जन्म प्रमाण पत्र हो जैसे

डरते हैं वापस न रखना पड़ जाय

पैसे देकर खरीदा हुवा सामान

गेट पर खड़ा सिक्यूरिटी वाला

स्वतंत्र है समझने लिए

हर किसी को चोर

बाहर आके ऐसा लगता है

कितना जरूरी काम

लटका पड़ा था कई दिनों से

निपट गया आज

हम ही

पहुचते हैं सब्जी मण्डी

हम कोई और हो जाते हैं

चूँ चपड़ तो क्या झाँव झाँव भी करते हैं

२० रुपये किलो की भिन्डी १८ रुपये में खरीदने के लिए

आधा किलो खरीद कर

बचा ही लेते हैं

एक रूपया

वाह! क्या हम और क्या हमारा देश

हम  खरीदते हैं हवाई चप्पल

एयर कंडीशंड माल से

खाने के लिए सब्जी

खरीदते हैं फुटपाथ से

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About sdtiwari

I am self employed professional engaged in Marketing and Product Launching.
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One Response to दोहरा व्यक्तित्व

  1. sunil kumar says:

    व्यंग्य का सहारा लेकर आप वार करते है , शुभकामनाएं

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