Monthly Archives: September 2010

मैं झूठ बोलता हूँ


ऐ दोस्त मेरे, मिला न कुछ तेरा हाल चाल तू खुश तो है, बच्चे तेरा रखते तो हैं ख़याल मैं स्वस्थ हूँ और ठीक हूँ, चिंता न करो तुम ईश्वर  करे  ऐसे  ही  सदा  मस्त  रहो  तुम मैं  चैन  से … Continue reading

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त्रासदी


जी करता है निराला, पन्त, प्रसाद, दिनकर, महादेवी और इन जैसे सभी रचनाकारों को एक पंक्ति में खड़ा करूँ और पूछूँ क्यों नहीं छोड़ा एक भी विषय जिसपर आज हम कुछ लिख सकते हँसने का विषय न रोने का विषय … Continue reading

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आशा


चमरौधे जूते की चरर मरर चरर मरर टेढ़ी पगडंडी पर चलता हुआ मूछों पर ताव ऐसे जैसे तलवार हो, महाराणा की सीना लिकला हुवा यूँ, जैसे गर्व समा न रहा हो इसमें तय करता है सफ़र, जैसे बिगडैल घोड़े की … Continue reading

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हालात


पहचान तो लूँगा उन्हें, हों कैसे भी हालात एक दौर था जब उनके ही पहलू में रहते थे साथ में गर जीने न पाए तो क्या हुआ हम साथ साथ मरने की बातें तो करते थे इक दौर था, इक … Continue reading

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जाने क्यों मैं जिन्दा हूँ


जाने क्यों मैं जिन्दा हूँ अपने हँसने, अपने रोने सब पर तो शर्मिंदा हूँ जाने क्यों मैं जिन्दा हूँ जिन्दा हूँ मैं शायद, क्यों कि मेरी जरूरत है अपनों को सोचें भी मेरे बारे में, फुर्सत जरा भी नहीं जिनको … Continue reading

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दो ग़ज़लें


ऐसी तरक़ीब कोई दोस्त बताये मुझको नीद भर सो लूँ, कोई ख़्वाब न आये मुझको आँख खुलती है और दुनियाँ से लड़ने लगता हूँ कभी तो मुज़्दुए नुमूँ नज़र आये मुझको ज़िन्दगी जी लूँ हलावत-ओ-इनकिसार भरी खंदाज़न औ ज़मील, मौजे-जूए-बार … Continue reading

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सबसे घृणित प्राणी


चल रही थी बहस सबसे घृणित प्राणी कौन है दुनियाँ का एक बुजुर्ग ने कहा वही जो लिए फिरता है अपनी वसीयत बीच में पैरों के बाँटता फिरता है यहाँ, वहाँ जाने कहाँ कहाँ हद ही हो गयी है अब … Continue reading

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