मेरी बिटिया


इठलाना दुलराना तेरा और मचलना बात बात पर
और मेरा हँसते ही  रहना जीत पे तेरी अपनी मात पर

कैसे जियूँ बिना तेरे अब तो मरने को मन करता है
बहुत हँसे हम साथ में तेरे अब रोने को मन करता है

वो तेरी मासूम हंसी और वो तेरी गीली पेशानी
वो तेरी आँखों के डोरे वो मेरी आँखों का पानी

इन्हें छोड़कर अब दुनियां में सब खोने को मन करता है
बहुत हँसे हम साथ में तेरे अब रोने को मन करता है

तू था फूल धूल का शायद तेरा नाम कभी शबनम था
चंदा मामा कितना प्यारा तेरे आगे फिर भी कम था

चंदा के मुखड़े को शबनम से धोने को मन करता है
बहुत हँसे हम साथ में तेरे अब रोने को मन करता है

तू मुझसे नाराज़ हुई क्यों आज तलक न जान सका
तुझसे जादा इस दुनिया में नहीं किसी को मान सका

तेरे बिन जीने की कोशिश न करने को मन करता है
बहुत हँसे हम साथ में तेरे अब रोने को मन करता है

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About sdtiwari

I am self employed professional engaged in Marketing and Product Launching.
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2 Responses to मेरी बिटिया

  1. सब ठीक तो है ?

    बड़ा दर्द उड़ेल दिया !

  2. sdtiwari says:

    सब ठीक है विवेक जी. कल्पना के घोड़े तो अपनी ही चाल में चलते हैं न.

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