Monthly Archives: October 2010

पडोसी


उस देश का तो भैया कुछ हो नहीं सकता जिस देश का हो सारा सिस्टम गला हुआ करते ही जा रहे हैं वो कोरी सी बकवास सारा का सारा जुमला पहले चला हुआ उस देश का अवाम तो गुमसुम अवाक … Continue reading

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ख्वाहिश


जलूँगा मैं यकीनन, है ये ख्वाहिश आखिरी मेरी खुशबू फैलाये, हर ज़र्रा मेरा लोहबान हो जाये गरीबों के बदन को भी मिले कुछ ढकने का सामां मजारें शर्म से खुद दाखिल-इ-शमसान न हो जाएँ गिरे कोई तो उसको मिल के … Continue reading

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खुशी के आँसू


हे बापू !!
सुनते हैं ?
ई लाठिया लिहे,
ठेहुनी पे धोती चढ़ा के,
कहाँ चल देते हैं सबेरे सबेरे
कौनो सुनता है आपकी
काहे लिए सेहत खराब करते है
रोज उतर के जाते हैं
झाँक के चले आते है

एक बार जो किये और जो पाए
लगता है पेट नही भरा

का देखने जाते हैं ?
घूम घूम के अपनी मूर्ति से
धूल झाड़ने जाते हैं का ?
और ई आज काहे लिए जा रहे हैं ?
आज तो चैन से बैठिये
जनम दिन है आपका
आज तो अपने आप ही चमकाएँगे
झंडा फहराएंगे
भाषण देंगे
और जाने का का नौटंकी करेंगे
……………………………..
……………………………..
लौट आये, बहुत जल्दी
का बात है
बहुत खुश हैं आज
ई देखो…. कैसे गदगद हैं
इतना खुश तो आज तक न दिखे
बहुत मुस्किया रहे हैं
प्रसन्न हैं
हम समझ गए
लगता है
बच्चे सुधर रहे हैं

हे बापू
आपको खुश देखके
आज हमरा मन भी बहुतै प्रसन्न है
देखिये न
हमरी आँखें
खुशी के आँसू हैं ये इनमे

हे भगवान, कितने साल बाद
देखी है ये मुस्कराहट

अब से आप दू बार जाइये न
नही रोकेंगे
पर ऐसे ही मुस्कराते रहा करिए
बापू….. तानी इधर देखिये
अब आपको का हुआ ?
काहे मुह घुमा के
आँख पोंछ रहे हैं
रो रहे हैं न ?
…………………
अरे नहीं भाग्यवान
आज लगा की मेंरी मेहनत सफल हो गयी
आज अपने बच्चों को
साथ साथ देख के बहुतै अच्छा लगा
जी भर आया
आज तो हम बहुत खुश हैं
हम रोएंगे काहे लिए?
ये तो खुशी के आँसू हैं

शेष धर तिवारी, इलाहबाद, २ अक्टूबर २०१०
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झमक झमक की झैय्यम झैय्यम


झमक झमक की झैय्यम झैय्यम झैय्यम झैय्यम झैय्यम

कहाँ गए सब शंख नगाड़े कहाँ गयीं तलवारें
कहाँ गए सब छुरे तमंचे गुप्ती और कटारें
हार गए सारे के सारे जीते तुम और हम
झमक झमक की झैय्यम झैय्यम झैय्यम झैय्यम झैय्यम

बहुत दिनों तक पंडित मुल्ला हमको पाठ पढाये
लगा समय पर समझ गए हम ये सब हैं बौराये
घाव लगाते यही और फिर देते हैं मरहम
झमक झमक की झैय्यम झैय्यम झैय्यम झैय्यम झैय्यम

अब तो भैया पंडित जी मुल्ला से लेंगे माला
पूजा अर्चन को जायेंगे मंदिर और शिवाला
टूटेगा न आसमान न होगा भ्रष्ट धरम
झमक झमक की झैय्यम झैय्यम झैय्यम झैय्यम झैय्यम

मज़हब नहीं सिखाता कोई दो औरो को गम
मुल्ला औ पंडित जी अब बन जायेंगे हमदम
जियो चैन से और जीने दो बहुत हुआ बम बम
झमक झमक की झैय्यम झैय्यम झैय्यम झैय्यम झैय्यम

एक दूजे के लिए बन्धु थोडा झुकना सीखो
गिरे साथवाला सँभालने को रुकना सीखो
आगे बढ़ना है तो सबको साथ ले चलें हम
झमक झमक की झैय्यम झैय्यम झैय्यम झैय्यम झैय्यम
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शरीफ आदमी


बहुत बड़े दादा हो
डान हो, कतली हो
का हो तुम?
अरे जो भी हो
मुझसे दूर रहो
एही में कल्याण है
मुझसे उलझे बेटा
समझो गए
पता भी नहीं चलेगा
कभी आये भी थे
याद करो
तुमसे पहले भी
थे कई महारथी
पर गए न एक एक करके
जस करनी तस भरनी
बेटा एक बात गांठ से बांध लो मेरी
अगर बहुत इच्छा है
कि तुमसे कोई एक आदमी डरे
तो दस से डरने के लिए तैयार रहो
यही नियम है दादागिरी का
और ई जो तमन्ची दिखा रहे हो न हमें
तरस आता है
कै ठो कारतूस है तुम्हरी जेब में
चार, छः, दस – बस
जखीरा देखे हो कभी
अब ई आँखें का फाड़ रहा है बे
का अंगरेजी बोल दिए का
जहाँ पेटी का पेटी रखा होत है
ओका कहते हैं जखीरा
देखोगे?
काँप काहे रहा है बे
बैठ, ले पानी पी
बेटवा, तूँ जे के बल पे उछलता है
ओका दम देइ वाला
इहाँ आ के ऐसहीं बैठता है
जैसे तुम बैठे हो अभी
बच्चे हो, जाओ माफ़ किया
पर आइन्दा…. ……
सुन, तोका एक अउर
पते का बात बता देतें हैं
याद रखोगे तो कुछ
जादा दिन जी जाओगे
बड़का से बड़का बदमाश न
तबहीं तक जिन्दा रहत है
जब तक ओके सर पे
कौनो शरीफ का हाँथ होत है
हाँथ हटा कि पत्ता कटा
खेल ख़तम अउर होई गए कहानी
अब तू सोच रहे हो न
कि आखिर हम कौन हैं
अरे बेटवा, घबराओ मत
हम बहुत शरीफ आदमी हैं. हा हा हा
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