Monthly Archives: January 2011

सूरज हमें बीमार लगता है


गए मौसम सरीका आज अपना प्यार लगता है पड़ोसी की वसीयत सा मेरा घर बार लगता है   कहाँ से लायें हम जज्बों में वो रूहानियत कल की कि अपने में हमें कोई छुपा अय्यार लगता है   जिसे देखो … Continue reading

Posted in Uncategorized | Tagged | 1 Comment

साँपों के फन मरोड़ सकता हूँ


तुम्हारी बेहिसी से थक क़े मैं मुह मोड़ सकता हूँ खुदा तुमसे कई जन्मो का रिश्ता तोड़ सकता हूँ लहू मेरा अगर मेरे वतन क़े काम आ जाए मैं सारा जिस्म अपना अपने हाँथ निचोड़ सकता हूँ सुनाती थी कहानी … Continue reading

Posted in Uncategorized | Tagged | 1 Comment

कब्रों में मुर्दे कहते हैं


आँखों में सपने बसते हैं आँसू भी हंसने लगते हैं कितना है आराम यहाँ पर कब्रों में मुर्दे कहते हैं जिंदा रहने की कोशिश में हम जाने कितना मरते हैं दुनिया रहने क़े नाकाबिल फिर भी तजने से डरते हैं … Continue reading

Posted in Uncategorized | Tagged | 1 Comment

मेरी माँ


स्नेह सिक्त मुख मंडल आँखें समुद्र सी गहरी ज्यों देख रही हो छितिज क़े उस पार तेज ऐसा की सूरज को भी ढाढस दे चेहरे का संतोष भाव ऐसा जैसे दिया हो सृष्टि को अभयदान मुस्कराहट ऐसी जैसे अभी अभी … Continue reading

Posted in Uncategorized | Tagged | Leave a comment

खुदा की मार


दिलासा बाप की माँ की दुआ बेकार लगती है जो बेटी हो दुखी तो हर हंसी बीमार लगती है हमारे सुख में मेरे साथ जो रहते थे अब उनको मेरे दुःख में मेरी हर बात अब मनुहार लगती है ` … Continue reading

Posted in Uncategorized | Tagged | Leave a comment

आबरू


किसी तालाब में तो जज्रोमद आते नहीं देखा कभी भी तंगदिल को जरफ़िशाँ होते नहीं देखा दिखाई हैं पड़े इंसान की शक्लों में भी बहशी किसी भी जानवर को आजतक हँसते नहीं देखा गलत होते बहुत से फैसले मुंसिफ के … Continue reading

Posted in Uncategorized | Leave a comment

उस्ताद बनिए जी


किसी की तर्बियत पे बेवज़ह न हाथ मलिए जी खुशी तो मुन्तजिर है आप अपना काम करिए जी बदल देने से केवल मोहरे तो कुछ नहीं हासिल अगर हो जीतनी बाज़ी तो अच्छी चाल चलिए जी महक तन की कहा … Continue reading

Posted in Uncategorized | Tagged | Leave a comment