गणतत्र दिवस


आ गया फिर एक बार
अपना गणतंत्र दिवस
फिर बुधुवा रखेगा उतार कर
सर पर रखी गठरी
बैठेगा टिका के पीठ
पेड़ के तने से
सुलगायेगा एक बीडी
भूलेगा थोड़ी देर को
थकान सफर की
दूर, चारे की खीज में
टीले की ढलान पर फंसी
डरती हुई उसकी बकरी
मिमियाएगी, कान हिला हिला के
मांगेगी मदद
पर हम उसकी मिमियाहट में
सुनेंगे मधुर संगीत
एक एक करके
“सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा”
“मेरा भारत महान”
“बतन की राह में बतन के नौजवान शहीद हो”
………………………………………….. ………
बुधुवा की बीडी खतम हो गयी भाई
गणतंत्र दिवस जिंदाबाद
एक लंबी सांस लेकर उठेगा
बंदे मातरम कहते हुए
फिर से गठरी को रखेगा सर पर
और चल देगा अपने रास्ते पर
जय हिंद, जय बुधुवा, जय बकरी, जय गठरी

शेष धर तिवारी
२५-०१-२०११

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