Monthly Archives: November 2011

गुलों को खूं बहाना आ गया है


गुलों को खूं बहाना आ गया है खुदा! कैसा ज़माना आ गया है उन्हें गुस्सा दिखाना आ गया है हमें भी मुस्कराना आ गया है करेंगे प्यार हम भी अब किसीसे हमें भी दिल दुखाना आ गया है हँसी खुलकर … Continue reading

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किसी की तर्बियत पर आप यूँ मत हाँथ मलिए जी


किसी की तर्बियत पर आप यूँ मत हाथ मलिए जी खुद अपनी काबिलीयत पर जरा विश्वास रखिये जी   फक़त मोहरे बदल देने से कुछ हासिल नही होता अगर हो जीतनी बाज़ी तो उम्दा चाल चलिए जी   दयारे-संग में भी हैं … Continue reading

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बेबसी में हम कभी रोते कभी हँसते रहे


बेबसी में हम कभी रोते कभी हँसते रहे मुश्किलों से बारहा हर हाल में लड़ते रहे ज़िंदगी की आंच में जो मोम सा गलते रहे वो मुसलसल वक़्त के सांचे में ही ढलते रहे आज से बेहतर रहेगा कल इसी … Continue reading

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जो इन्सां को इन्सां नहीं मानते हैं


जो इन्सां को इन्सां नहीं मानते हैं यकीनन खुदा को नहीं जानते हैं यूँ रूठे हैं जैसे हों किस्मत हमारी न वो मानती है न ये मानते हैं हम इंसान की बस्तियाँ ढूँढने को जमीं छोड़ कर आसमां छानते हैं … Continue reading

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